30 दिन की ‘भंसार सीमा’ ने बढ़ाई चिंता, भारतीय पर्यटक वाहनों के लिए व्यावहारिक समाधान की मांग
मनोज कुमार त्रिपाठी
सोनौली/गोरखपुर। नेपाल में भारतीय पर्यटक वाहनों के अस्थायी प्रवेश पर लागू 30 दिन की वार्षिक सीमा अब भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र के ट्रैवल और परिवहन कारोबारियों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही है। मामले की वास्तविक स्थिति और इसके संभावित समाधान को समझने के लिए पूर्वांचल ट्रैवल वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने सोनौली और ककरहवा सीमा का दौरा किया और संबंधित अधिकारियों से बातचीत की।
एसोसिएशन के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा के नेतृत्व में सौरभ मिश्रा, सत्तेंद्र पाठक, दीपक शर्मा और प्रवीण तिवारी प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे। टीम ने पहले ककरहवा बॉर्डर पर जानकारी ली और इसके बाद सोनौली भन्सार कार्यालय पहुंचकर भन्सार प्रमुख हरिहर पौडेल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें ज्ञापन सौंपते हुए भारतीय पंजीकृत पर्यटक वाहनों के सामने आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को रखा।
नियम पुराना, लेकिन ऑनलाइन सिस्टम ने बढ़ाई सख्ती
प्रतिनिधिमंडल को भन्सार अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक भारतीय वाहनों के नेपाल में 30 दिन तक रहने का प्रावधान नया नहीं है। पहले भन्सार प्रक्रिया ऑफलाइन होने के कारण अलग-अलग यात्राओं में वाहन के नेपाल में बिताए गए दिनों का समेकित रिकॉर्ड प्रभावी तरीके से ट्रैक नहीं हो पाता था।
अब ऑनलाइन भन्सार प्रणाली में वाहन नंबर के आधार पर रिकॉर्ड दर्ज हो रहा है। अलग-अलग यात्राओं के दिन जुड़ते जा रहे हैं और 30 दिन की निर्धारित सीमा पूरी होने के बाद उसी वाहन का आगे भन्सार प्रभावित हो सकता है।
‘नियम का विरोध नहीं, समाधान चाहते हैं’
द इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ से बातचीत में एसोसिएशन के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने कहा कि उनका उद्देश्य नेपाल के किसी नियम का विरोध करना नहीं है। उनकी मांग है कि ऐसा व्यावहारिक रास्ता निकाला जाए, जिससे नियमों का पालन भी हो और भारत-नेपाल के पर्यटन एवं रोजगार पर प्रतिकूल असर भी न पड़े।

उन्होंने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए प्रतिनिधिमंडल आगे भारत और नेपाल, दोनों सरकारों के संबंधित स्तरों पर मामला उठाने की तैयारी कर रहा है।
छोटे वाहन संचालकों पर सबसे ज्यादा असर
एसोसिएशन का कहना है कि सीमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में ट्रैवल एजेंट, टूर ऑपरेटर, वाहन मालिक, चालक और अन्य सेवा प्रदाता नेपाल के पर्यटन कारोबार से जुड़े हैं। एक-दो वाहन रखने वाले छोटे संचालकों के लिए बार-बार वाहन बदलना संभव नहीं है।
ऐसे में 30 दिन की सीमा पूरी होने के बाद उनके कारोबार, वाहन की किस्त, बीमा, रखरखाव, कर्मचारियों के वेतन और परिवार की आय पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
नेपाल के पर्यटन कारोबार पर भी पड़ सकता है असर
एसोसिएशन ने यह भी तर्क दिया कि भारतीय पर्यटक केवल वाहन के माध्यम से नेपाल नहीं पहुंचते, बल्कि वहां होटल, रेस्टोरेंट, स्थानीय परिवहन, गाइड, केबल कार, बोटिंग, टिकटिंग और खरीदारी जैसी सेवाओं पर भी खर्च करते हैं।
यदि भारतीय पर्यटक वाहनों के आवागमन में अतिरिक्त परेशानी या लागत बढ़ती है तो इसका असर नेपाल के पर्यटन कारोबार पर भी पड़ सकता है।
210 दिन या 30 प्रवेश की मांग
एसोसिएशन ने पंजीकृत भारतीय व्यावसायिक पर्यटक वाहनों के लिए मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का सुझाव दिया है। इनमें 30 दिन की सीमा को बढ़ाकर कम से कम 210 संचयी दिन करने या साल में 30 प्रवेश का वैकल्पिक प्रावधान शामिल है।

साथ ही निजी वाहनों, अनधिकृत यात्री परिवहन और पंजीकृत व्यावसायिक पर्यटक वाहनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था की मांग की गई है।
सांसद से लेकर विदेश मंत्रालय तक पहुंचेगा मामला
अब एसोसिएशन पहले स्थानीय सांसद के माध्यम से इस मुद्दे को केंद्र सरकार तक पहुंचाने की तैयारी में है। इसके बाद उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय को पत्र भेजने की बात कही गई है। साथ ही भारतीय दूतावास और नेपाल के वित्त मंत्रालय तक भी मांग पहुंचाने की तैयारी है।
एसोसिएशन ने भारत और नेपाल के ट्रैवल एसोसिएशन, वाहन संचालकों, होटल व्यवसायियों और पर्यटन विशेषज्ञों की संयुक्त बैठक कराने की भी मांग की है।
BBIN Motor Vehicles Agreement लागू करने की मांग
एसोसिएशन ने भारत सरकार से BBIN Motor Vehicles Agreement को प्रभावी बनाने की दिशा में लंबित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने का अनुरोध भी किया है।
आशुतोष शर्मा ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध भी हैं। इसलिए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे नेपाल के नियम और राजस्व सुरक्षित रहें, स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा मिले, भारतीय वाहन संचालकों की आजीविका प्रभावित न हो और यात्रियों को सुविधाजनक एवं किफायती सेवा मिल सके।
द इंडिया एक्सप्रेस न्यूज़ के लिए मनोज कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट, सोनौली बॉर्डर, महाराजगंज।


