नेपाल ने भारतीय आम के आयात पर लगाई रोक
बाजार में बढ़ी महंगाई की आशंका
उमेश चन्द्र त्रिपाठी
महराजगंज! भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक गतिविधियों के बीच नेपाल सरकार ने भारतीय आमों के आयात पर रोक लगा दी है। सरकार ने इस फैसले के पीछे आमों में कथित रूप से अधिक कीटनाशक पाए जाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्याप्त क्वारंटीन सुविधाओं की कमी को वजह बताया है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इस कदम का उद्देश्य स्थानीय फलों को बढ़ावा देना भी हो सकता है। नेपाल के इस फैसले से फल व्यापारियों और बाजारों में चिंता बढ़ गई है।
नेपाली अधिकारियों के अनुसार, भारत से आने वाले कुछ आमों में कीटनाशकों की मात्रा निर्धारित मानकों से अधिक पाई गई। इसके अलावा सीमा क्षेत्रों में फलों की गुणवत्ता जांच के लिए पर्याप्त क्वारंटीन व्यवस्था नहीं होने के कारण सरकार ने आयात पर अंकुश लगाने का फैसला किया है।

सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है, लेकिन व्यापारिक संगठनों का मानना है कि इसका असर बाजार पर पड़ सकता है।
भारतीय आमों की आपूर्ति रुकने के बाद भैरहवा, बुटवल और जनकपुरधाम समेत कई बाजारों में स्थानीय स्तर पर उत्पादित आमों की बिक्री बढ़ गई है। हालांकि, फल कारोबारियों का कहना है कि केवल घरेलू उत्पादन के भरोसे पूरे बाजार की मांग पूरी करना आसान नहीं होगा। गर्मी के मौसम में आम की मांग सबसे ज्यादा रहती है और ऐसे समय में आयात पर रोक से आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
जनकपुरधाम फल एवं सब्जी व्यापारी संघ के महासचिव भुवनेश्वर पुर्वे का कहना है कि स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना अच्छी बात है, लेकिन बिना दीर्घकालिक योजना के आयात रोकना व्यापार के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
उन्होंने बताया कि सप्तरी, सिरहा, महोत्तरी, धनुषा और सर्लाही जिलों से रोजाना 50 टन से अधिक आम जनकपुरधाम पहुंच रहे हैं, लेकिन यह मात्रा पूरे बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि यह प्रतिबंध लंबे समय तक जारी रहा तो बाजार में आम की कमी हो सकती है, जिससे कीमतों में तेजी आने की संभावना है। उनका सुझाव है कि पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय सरकार को क्वारंटीन और गुणवत्ता जांच प्रणाली को मजबूत करना चाहिए, ताकि परीक्षण के बाद भारतीय फलों को बाजार में प्रवेश दिया जा सके।
व्यापारियों ने बताया कि भारतीय केले की आपूर्ति बाधित होने के बाद नेपाल में उसकी कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी। अब आम के मामले में भी वैसी ही स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है। उनका कहना है कि लंबे समय तक आयात बंद रहने से उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है और कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हाल ही में जापान ने भी भारत से निर्यात होने वाले आमों की कुछ खेपों पर प्रतिबंध लगाया था। जापान सरकार ने कीट नियंत्रण और ‘वेपर हीट ट्रीटमेंट’ (VHT) मानकों में कमी का हवाला देते हुए 25 मार्च 2026 के बाद जारी प्रमाण-पत्र वाली खेपों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारतीय निर्यातकों के लिए गुणवत्ता मानकों को और मजबूत करने का संकेत है।