महराजगंज एआरटीओ कार्यालय में कथित वसूली का आरोप, अधिवक्ताओं ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर 5,500 से 8,000 रुपये तक वसूली का आरोप, डीटीआई और दलालों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग

मनोज कुमार त्रिपाठी 

महराजगंज! जिले के एआरटीओ कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने और उसके नवीनीकरण की प्रक्रिया को लेकर कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। सरकारी कार्यालय में दलालों की सक्रियता और निर्धारित शुल्क से अधिक धनराशि वसूले जाने के आरोपों को लेकर अधिवक्ताओं ने शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल को शिकायती पत्र सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

अधिवक्ताओं का आरोप है कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, नवीनीकरण और अन्य संबंधित प्रक्रियाओं के नाम पर आवेदकों से बिचौलियों के माध्यम से मनमानी रकम मांगी जा रही है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में इस कथित वसूली की रकम 5,500 से 8,000 रुपये तक बताई गई है। वहीं, शुल्क की स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध नहीं होने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

डीटीआई की भूमिका पर भी उठे सवाल

अधिवक्ताओं के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से लाइसेंस नवीनीकरण, ट्रांसपोर्ट लाइसेंस और स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित टेस्ट की जिम्मेदारी निजी कंपनी ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (डीटीआई) को सौंपे जाने की व्यवस्था लागू हुई है। 

शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाया कि जब टेस्ट की प्रक्रिया डीटीआई के माध्यम से पूरी होती है और अंतिम परिणाम आरआई (रीजनल इंस्पेक्टर) के लॉगिन से दर्ज होता है, तो पूरी व्यवस्था में किसकी क्या जिम्मेदारी है?

अधिवक्ताओं ने मांग की कि डीटीआई में जमा कराई जा रही फीस और शासन द्वारा निर्धारित शुल्क का मिलान कराया जाए। साथ ही टेस्ट प्रक्रिया, आरआई के लॉगिन के इस्तेमाल और कार्यालय के अंदर-बाहर सक्रिय कथित बिचौलियों की भूमिका की जांच हो। 

डीएम से कार्रवाई की मांग

जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, कथित अवैध वसूली में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने तथा संबंधित निजी कंपनी की भूमिका की जांच करने की मांग की। 

अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस व्यवस्था पर ध्यान दिया गया होता तो आम जनता को इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।

प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान जुगुल किशोर पटेल, संतोष गुप्ता, अकबर अली, दुर्गेश श्रीवास्तव, अमित कुमार यादव, आशीष गुप्ता, विनय पासवान, शकील अहमद, बैजनाथ यादव, सुरेंद्र, धनंजय गुप्ता, नितिन, सुनील गुप्ता, राजेश गुप्ता और शेषमणि सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर निगाहें

एआरटीओ कार्यालय में कथित वसूली और बिचौलियों की सक्रियता को लेकर उठे सवालों ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी होगी, ताकि आम नागरिकों को पारदर्शी व्यवस्था में सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके।

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